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कर्नाटक में “ॐ” के प्रयोग पर रोक लगी

राजनीति में जब सेकुलरवाद हावी हो जाता है तो कैसे विचित्र नियम बना दिये जाते हैं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण कर्नाटक है। राज्य के एक विश्‍वविद्यालय ने नियम बना दिया है कि कोई भी छात्र उत्तर-पुस्तिकाओं में सबसे पहले “ॐ” या ‘श्री’या ऐसे ही किसी पवित्र आकृति का प्रयोग नहीं करेगा। नियम बनाने वाला संस्थान ‘राजीव गाँधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्‍व विद्यालय’ है। (डी.एन.ए. 5 अक्तू.)

पूरी दुनिया “ॐ” की शक्ति से चमत्कृत है। अमरीका और यूरोप के शीर्ष के वैज्ञानिक ॐ=MC2 विषय पर गोष्ठियाँ और चर्चा-सत्र आयोजित कर रहे हैं। वे मानते हैं कि ॐ के उच्चारण से असीम ऊर्जा पैदा की जा सकती है (देखें पाथेय कण -1 मई 2018)। और भारत के सेकुलरवादी “ॐ” पर रोक लगा रहे हैं। प्राचीन काल से ही हमारे यहाँ कुछ भी लेखन प्रारम्भ करने से पहले मंगल चिन्ह अंकित करने की परम्परा रही हैं। सेकुलर गठजोड़ हमारी सभी परम्राओं को नष्ट करने में लगा है।

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