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नवीन अंक
16-June-2018
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01-May-2018

टिश इतिहासकार स्टीफन ने प्रमाणित कर दिया है कि ताजमहल एक वैदिक मन्दिर है, तथा शाहजहाँ का बनवाया हुआ नहीं है। उन्होंने प्रमाण स्वरूप कई चित्र भी दिये हैं जो अभी ‘गूगल’ पर उपलब्ध हैं। अनेक स्थानों पर दिये गये भाषणों में भी श्री नेप ने सिद्ध किया है कि ताजमहल प्राचीन शिव मंदिर है।

आपको उक्त सूत्र विचित्र लग रहा होगा क्योंकि महान् वैज्ञानिक ॠषि आइंस्टीन ने जो सूत्र दिया वह है, E = mc2 अर्थात् किसी वस्तु की मात्रा (संहति) को प्रकाश की गति के वर्ग से गुणा करने पर उस पदार्थ से प्राप्त होने वाली ऊर्जा आ जाती है। लेकिन यहाँ ‘ॐ’ का क्या काम है? यह हमारी समझ में नहीं आयेगा

भारत में ईसा से कई सौ सालों पहले शिक्षा के विशाल एवं प्रतिष्ठित केन्द्र थे। इनका उल्लेख उस समय भारत आने वाले यूनानी एवं चीनी यात्रियों ने किया है। इनमें से नालन्दा, तक्षशिला और विक्रमशिला (उज्जैन) विश्‍वविद्यालयों की प्रसिद्धि पूरी दुनिया में थी। तक्षशिला वि.वि. में तो ईसा मसीह ने भी शिक्षा प्राप्त की थी।

हैदराबाद के ‘श्रीरंगनाथन मंदिर’ में पिछले दिनों सामाजिक समरसता का अनूठा उदाहरण देखने को मिला। बीती 18 अप्रेल को मंदिर के पुजारी ने समाज में अस्पृश्य कहे जाने वाले श्री आदित्य परासरी को वैदिक मंत्रों के साथ मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश एवं पूजा कराकर समाज के मध्य एक प्रेरक आदर्श प्रस्तुत किया।

भारत के वाम-मार्गी गजब के पाखण्डी हैं। हिन्दू-धर्म को नकारने, देवी-देवताओं का मजाक उड़ाने और मूर्ति-पूजा का उपहास करने वाले कामरेड लेनिन की मूर्ति गिराये जाने पर सड़कों पर उतर आये। यही स्थिति आधार-कार्ड के बारे में है। सर्वोच्च न्यायालय में तथा अन्य मंचों पर कामरेड ‘आधार’ को पानी पी-पी कर कोस रहे हैं।

देश के जाने-माने विश्‍वविद्यालय दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विवि में अब वेद-पुराण स्मृतियों को जानने वाले विद्वान तथा वास्तु-शास्त्री भी तैयार किये जायेंगे। अब तक यहाँ अधिकतर नक्सली ही तैयार किये जाते थे। विवि के ‘स्कूल ऑफ संस्कृत एण्ड इंडिक स्टडीज’ ने पिछले दिनों उक्त निर्णय लिया।

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टिश इतिहासकार स्टीफन ने प्रमाणित कर दिया है कि ताजमहल एक वैदिक मन्दिर है, तथा शाहजहाँ का बनवाया हुआ नहीं है। उन्होंने प्रमाण स्वरूप कई चित्र भी दिये हैं जो अभी ‘गूगल’ पर उपलब्ध हैं। अनेक स्थानों पर दिये गये भाषणों में भी श्री नेप ने सिद्ध किया है कि ताजमहल प्राचीन शिव मंदिर है।

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मिताकुये ओयासिन
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मिताकुये ओयासिन

‘मिताकुये ओयासिन’ मूल अमरीकियों की एक कहावत है। इसका अर्थ है- हम सब आपस में जुड़े हैं। कितना अंतर है अमरीका...

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पाथेय कण राजस्थान के हिन्दू समाज को गत 30 वर्ष से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय जागरण और धर्म के संस्कार देने का उदात्त काम कर रहा है। जनता को जाग्रत करना वहीं सबसे बड़ा सामाजिक परिवर्तन का आधार है और पाथेय कण इतनी बड़ी संख्या में राजस्थान की धर्म एवं राष्ट्र रक्षा की परम्परा जाग्रत कर रहा है। पाथेय कण राजस्थान के हर गांव और हर परिवार तक पहुँचे यही अभ्यर्थना व्यक्त करता हूँ।

डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया

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पाथेय कण अपने संक्षिप्त कलेवर में मानव जीवन की धन्यता के लिए नितान्त आवश्यक दक्षता के साथ सुदीर्घकाल से सुदीर्घक्षेत्र में परोस रहा है, जो अत्यन्त प्रशंसनीय है। धर्म-अध्यात्म-राष्ट्रीयता-स्वदेशी जागरण- भारतभूमि का गौरव इत्यादि अनेक मांगलिक पाथेय कणों का निरन्तर प्रवाह राष्ट्र के लिए गौरव की बात है। पाथेय कण की यह यात्रा परममांगलिक हो, विराट् हो तथा चिरस्थायी भी हो, इसी सद्भावना के साथ परमप्रभु श्रीरामजी के श्रीचरणों में प्रार्थी हूँ।

स्वामी रामनरेशाचार्य

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लोगों की समस्याओं को उजागर करने के साथ-साथ समाज के विकास की बातों को भी लोगों के सामने रख कर जन-जन में राष्ट्रीय, सामाजिक और धार्मिक चेतना जगाना और सुदृढ़ बनाने का उत्तरदायित्व अखबार और मीडिया का बनता है।पाथेय जन-जन में भेदभाव रहित धार्मिकता , सामाजिकता एवं राष्ट्रीयता को जाग्रत करने में सफल हो।

नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री भारत सरकार

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अपने सांस्कृतिक मूल्यों और परम्पराओं के लिये ख्यात राजस्थान का इतिहास भी गौरवशाली रहा है। इन मूल्यों तथा परम्पराओं की झलक जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक पाथेय कण में महसूस की जा सकती है।

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

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