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हिन्दुओं का भीषण नरसंहार किया था रोहिंग्याओं ने

जैसे चीन के जिन जियांग प्रांत में उईघर मुसलमानों का आतंक है वैसे ही म्यांमार (ब्रह्मदेश) के रेखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुस्लिमों ने हिंसा फैला रखी है। मानवाधिकारों का संरक्षण करने वाली संस्था एम्नेस्टी इंटरनेशनल ने पिछले दिनों रोहिंग्याओं के म्यांमार से भागने के कारणों की जाँच की थी। भारत और बांग्लादेश में बड़ी संख्या में रोहिंग्याओं की घुसपैठ एक अन्तर्राष्ट्रीय समस्या बन गई है। छान-बीन के बाद एम्नेस्टी ने जो रिपोर्ट जारी की, वह गत 24 मई के सभी समाचार पत्रों में प्रकाशित हुई। एम्नेस्टी ने बताया कि रोहिंग्याओं ने म्यांमार में रह रहे हिन्दुओं का किस क्रूरता से नरसंहार किया था।
म्यांमार के रोहिंग्याओं ने अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी बना रखी है। इसका एकमात्र उद्देश्य रेखाईन प्रांत को म्यांमार से अलग कर इसे इस्लामी देश बनाना है। 25 अगस्त 2017 के दिन इस उग्रवादी गिरोह के लोगों ने अन्य रोहिंग्याओं की सहायता से आनोक खामोंग सेक गाँव को घेर लिया तथा पचास हिन्दुओं को पकड़ लिया। इनमें दस महिलाएं तथा 23 बच्चे थे। 14 बच्चे आठ साल से भी कम के थे। गाँव के बाहर ले जा कर सभी को निर्ममता से मार दिया गया। दूसरे दिन पास के येबौक कार गाँव से भी पचास से अधिक हिन्दुओं को महिलाओं और बच्चों सहित पकड़ा गया और उनकी हत्या कर दी गई। इस प्रकार दो दिनों में 105 हिन्दुओं का नरसंहार किया गया ।
आश्‍चर्य है कि इन्हीं नर-पिशाचों के पक्ष में ढेरों सेकुलरवादी वकील सर्वोच्च न्यायालय में खड़े हैं। सेकुलर-लिबरल-नक्सल गठजोड़ के जाने-माने वकील भारत सरकार के रोहिंग्याओं को भारत से निकालने के निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।
वकीलों की फौज उच्चतम न्यायालय में तर्क दे रही है कि मानवता के नाम पर रोहिंग्याओं को भारत में रहने की अनुमति दी जाये। ऐसे लोग जब देश में मौजूद हैं तो किसी बाहरी शत्रु की जरूरत ही नहीं है।
उधर तृणमूल कांग्रेस के राज में रोहिंग्याओं की मेहमानों की तरह आवभगत की जा रही है। अंग्रेजी दैनिक ‘टाइम्स ऑफ इण्डिया’(4जून) के अनुसार बंगाल में और असम में कई मुस्लिम एन.जी.ओ. रोहिंग्याओं को न केवल बसा रहे हैं, बल्कि उनके पहचान-पत्र और मतदाता-प्रमाण पत्र भी बनवा रहे हैं।

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