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स्वयंसेवकों ने भोजन बाँटा और पादरियों ने बाइबिल

पिछले दिनों केरल और तमिलनाडु के समुद्री किनारों पर ‘ओखी’ नाम का तूफान आया था। इसमें काफी मुछआरे हताहत हुए तथा अनेक लापता भी हो गये। आपदा आते ही संघ के स्वयंसेवक सक्रिय हो गये तथा पीड़ितों को भोजन पैकेट ,कपड़े पहुँचाने में लग गये। कन्याकुमारी में केलों के लगभग एक लाख पेड़ सड़कों पर गिर गये तथा सड़कें पूरी तरह बन्द हो गईं। कार्यकर्ताओं ने सौ टोलियाँ बनाईं तथा सड़कें साफ करने में जुट गये। देखते-देखते सारी सड़कें आने-जाने के लिये खुल गईं। इसके अतिरिक्त तूफान पीड़ितों को प्लास्टिक की चटाइयाँ, पानी की बोतलें, दूध की थैलियाँ तथा मोमबत्तियाँ भी तुरत-फुरत पहुँचाई गईं।
उधर पादरी पीड़ितों को बाइबिल बांट रहे थे। केरल के त्रिवेन्द्रम जिले में लगे तटवर्ती क्षेत्र में बसे गाँव ईसाई या मुसलमानों के हैं। इनमें केन्द्र और राज्य सरकार की सहायता पर भी पादरियों ने कब्जा कर लिया। उस सामग्री को उन्होंने अपनी इच्छानुसार बाँटा तथा राहत सामग्री के साथ एक बाइबिल का गुटका भी पकड़ा दिया। यही नहीं चर्च ने असहाय मजदूरों में केन्द्र सरकार के खिलाफ असंतोष पैदा कर उन्हें आन्दोलन के लिए उकसा दिया। इसी क्षेत्र में गरीब हिन्दू किसान भी हैं। उनकी केले की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है। इन किसानों को कोई राहत सामग्री न मिल पाये, इसकी पूरी कोशिश चर्च ने की।

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