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संघ के सरकार्यवाह भैया जी जोशी ने कहा-

विश्‍व कल्याण का मार्ग भारत से होकर निकलेगा
‘देश के विभाजन में आज सबसे बड़ी बाधा हीनता का भाव है। लोग दूसरे देशों या उनकी संस्कृति से खुद को हीन समझने लगे हैं। भारत को जापान, चीन, अमेरिका जैसे दूसरे देशों का अनुकरण करने के बजाय भारत को भारत रहने की आवश्यकता है। देश के युवाओं में हीनता का भाव हटा कर संस्कृति, भाषा, विचार आदि के लिए उन्हें जागरूक करने का संकल्प लेना होगा। युवा पीढ़ी को यह समझना होगा कि विश्‍व कल्याण का मार्ग भारत से होकर ही निकलेगा।’ यह कहना है संघ के सरकार्यवाह श्री सुरेश जोशी का। वे गत 29 दिसम्बर को मानसरोवर स्थित ‘संस्कृति कॉलेज के सभागार में आयोजित प्रबुद्ध जन सम्मेलन में बोल रहे थे। गोष्ठी का विषय ‘विश्‍व कल्याण का मार्ग-हिन्दू जीवन पद्धति’ था।
उक्त विषय पर उन्होंने कहा कि संबंध कानून से नहीं बल्कि भावनात्मक लगाव के कारण चलते हैं। भारतीय समाज का चिंतन है कि मानव की जीवन शैली परस्पर संबंधों के आधार पर विकसित हुई है। शरीर साधन है, कोई स्थायी वस्तु नहीं है। शरीर नश्‍वर है, लेकिन आत्मा अविनाशी है। यह मानने वाला हिंदू है। इस धारणा को हटाने पर विनाश के अलावा कुछ नहीं है। भारत की जीवन शैली सकारात्मक सोच वाली है, जो अच्छाई के लिए प्रेरित करती है।
उन्होंने यह भी कहा कि आज देश में हीन भावना से ग्रस्त होने की चुनौती को दूर करने के लिए परिवार संगठनों के साथ-साथ सभी को मिलकर प्रयास करने होंगे तभी समाज में आई इन विकृतियों को दूर किया जा सकेगा। कार्यक्रम में सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी, न्यायिक तथा प्रशासनिक सेवा में रहे अधिकारीगण, प्रोफेसर एवं व्यवसायिक क्षेत्रों से आये प्रबुद्धजनों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ज्ञात हो कि देश में हिन्दुत्व को लेकर कई प्रकार का भ्रामक दुष्प्रचार चल रहा है। ऐसे में देश में स्थान-स्थान प्रबुद्धजन सम्मेलन का आयोजन कर इन वैचारिक भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है। इसी कड़ी में जयपुर में यह कार्यक्रम रखा गया था।

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