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लाखों उईघर चीन के श्रम-शिविरों में बन्द हैं

साम्यवादी चीन की पश्‍चिमी सीमा कजाकस्तान, ताजिकिस्तान और किरगिजिस्तान से लगती है। ये सभी मुस्लिम देश हैं। इसी प्रकार उत्तर-पश्‍चिमी चीन का प्रांत जिन जियांग भी मुस्लिम बहुल है। यहाँ उईघर मुसलमान काफी संख्या में हैं और अन्य स्थानों की तरह उग्रवाद और अलगाववाद को बढ़ावा दे रहे हैं। उईघरों ने चीनी सरकार की नाक में दम किया हुआ है। उधर प्रशासन भी इन पर नियंत्रण का पूरा प्रयत्न कर रहा हैं। अंग्रेजी दैनिक इकॉनॉमिक टाइम्स (25 अप्रेल) में प्रकाशित एक समाचार के अनुसार चीनी सरकार ने उईघर मुसलमानों की अक्ल ठिकाने पर लाने के लिये कई श्रम-शिविर खोल दिये हैं। लगभग सवा लाख कट्टर उईघर इन कैंम्पों में दिन-रात मेहनत करते हैं और साम्यवाद के पाठ भी पढ़ते हैं।
साम्यवादी रूस में भी ऐसे ‘कन्सन्ट्रेशन कैम्प’ बने हुए थे। ये अधिकतर साइबेरिया में थे जहाँ तापमान हमेशा शून्य से कम रहता हैं और जो दुनिया का सबसे ठण्डा क्षेत्र है। साम्यवादी रूसी सरकार का विरोध करने वालों को तब साइबेरिया के श्रम-शिविरों में भेज दिया जाता था। ऐसे ही कैम्प चीन ने भी उईघरों के लिये शुरु किये हैं।
आतंकवाद समाप्त करने के लिये चीन ने बुरका और दाढ़ी पर पहले से ही रोक लगा रखी है। उईघरों को अपने बच्चों के नाम भी चीनी रखने होंगे; मोहम्मद, खान,शेख आदि नहीं। अरबी या उर्दू में कुरान रखने पर भी चीन में रोक है। चीनी भाषा में लिखी कुरान ही चीन में रखी और पढ़ी जा सकती है। पिछले दिनों पाकिस्तान से चीन गये लोगों की पत्नियों से चीनी सरकार ने पूछ-ताछ की। ये सारी महिलाएं उईघर समुदाय की थी। पाकिस्तानियों से विवाह कर ये वहीं रहने लगी थीं। पिछले दिनों जब ये चीन पहुँची तो वहाँ के सुरक्षा अधिकारियों ने इनको नजरबन्द रखा। इससे पाकिस्तान भी नाराज है।

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