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रवाण्डा भी समझता है गायों का महत्व

रवाण्डा एक छोटा सा अफ्रीकी देश है जो यूगाण्डा, कांगो और तंजानिया के बीच में फँसा हुआ है। अपने मुम्बई महानगर जितनी इसकी आबादी है। फ्रेंच और स्वाहली भाषाएं यहाँ मुख्य रूप से बोली जाती हैं। मुख्य रूप से मुस्लिम तथा ईसाई समुदाय ही यहाँ रहता है। मुस्लिम-ईसाई देश होने के बाद भी यहाँ गायों का बड़ा महत्व है। वहाँ की सरकार ने एक गिरिका योजना रवाण्डा में चला रखी है। इस योजना में गरीब परिवारों को सरकार एक-एक गाय देती है। उस एक गाय से वे अपनी रोजी-रोटी पैदा करते हैं। यह योजना बड़ी सफल रही है। बड़ी संख्या में गरीब परिवारों ने केवल एक गाय के सहारे अपनी गरीबी दूर कर ली।
रवाण्डा के एक आदर्श ग्राम में भी प्रत्येक परिवार में एक गाय अवश्य है। गत 24 जुलाई को भारत के प्रधानमंत्री वहाँ की यात्रा पर गये तो उन्होंने वहाँ की सरकार को 200 गायें भेंट कीं।
और भी अनेक देश हैं जिनमें गो-माता का सम्मान किया जाता है। प्रसिद्ध टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर 2003 में जब पहला विम्बलडन प्रतियोगिता जीते तो स्विट्जरलैण्ड के उनके देशवासियों ने उन्हें एक गाय भेंट की। विश्‍व में सबसे अधिक दूध डेन्मार्क में होता है। यह सारा दूध गायों का ही होता है। उरुग्वे की कुल जनसंख्या 35 लाख है लेकिन गायें वहाँ डेढ़ करोड़ हैं।
सेकुलरवादी भारत में ही गो-तस्करी होती है।

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