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यह बंगाल है या दूसरा पाकिस्तान है

बंगाल में जिहादियों का राज हो गया है और हिन्दुओं का दमन चल रहा है। कट्टरपंथियों ने राज्य के सत्ताधारी दल पर पूरी पकड़ बना ली है तथा विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं को हिंसा का निशाना बना रहे हैं। गत 30 मई से 2 जून के बीच भारतीय जनता पार्टी के दो कार्यकर्ताओं को नृशंसता से मौत के घाट उतार दिया गया। प्रश्‍न उठता है कि यह भारत का बंगाल है या दूसरा पाकिस्तान है?
31 मई को बलरामपुर (पुरुलिया जिला) में बीस साल के त्रिलोचन महतो का शव एक पेड़ पर लटका मिला। उसकी कमीज पर पीछे बंगला में लिखा था- 18 वर्ष की आयु में भाजपा की राजनीति, आज तुम्हारे जीवन का अंत होता है। त्रलोचन महतो इतिहास (आनर्स) में स्नातक कर रहे थे तथा भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता थे।
2 जून को पुरुलिया जिले में ही 30 वर्ष के दुलार कुमार हाईटेंशन टॉवर पर लटके मिले। स्व. दुलाल कुमार भाजपा के ओबीसी मोर्चे के मण्डल अध्यक्ष थे। सभी घटनायें बंगाल के पंचायत चुनावों के बाद की है। पंचायत चुनावों में दस में चार तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी तो निर्विरोध ही चुन लिये गये। शेष स्थानों पर भी विपक्षी उम्मीदवारों को डराया धमकाया गया। फिर भी जो खड़े रहे उन्हें और उनके समर्थकों को अब सबक सिखाया जा रहा है।
आश्‍चर्य की बात यह है कि मीडिया और सेकुलर जमात ने इन घटनाओं के विरोध में कोई मौन जुलूस नहीं निकाले, चौराहों पर मोमबत्तियाँ नहीं जलाईं तथा कोई धरना नहीं दिया। देश के ‘ज्ञानी’ लोगों ने घटनाओं की निन्दा करना तो दूर अपनी आँखें ही बन्द कर लीं। सम्पादकों, स्तम्भ लेखकों की कलम को लकवा मार गया। अभिव्यक्ति की आजादी वाली ब्रिगेड ने भी कुछ नहीं किया। मरने वाले यदि तथाकथित अल्पसंख्यक समुदाय के होते और ऐसी ही घटना यदि उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, मध्यप्रदेश में हुई होती तो अब तक तो सेकुलर बिरादरी का शोर इन्हें अन्तर्राष्ट्रीय महत्व की घटना बना देता।

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