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भारत में निर्मित टीके को मान्यता न मिले, इसके लिए कई लोगों ने कोशिश की- मुख्य न्यायाधीश रमण

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अपनी महान उपलब्धि को कम आंकना मानसिक गुलामी
भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति एनवी रमण ने कहा है कि मेड इन इंडिया (भारत में निर्मित) कोरोना की वैक्सीन (कोरोना-टीका) ‘कोवैक्सीन’ को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मान्यता देने से रोकने के लिए भारत के भीतर के कई लोगों ने कोशिश की थी। कोवैक्सीन को अपने ही लोगों ने बदनाम करने का अनुचित प्रयास किया। न्यायमूर्ति रमण हैदराबाद में 25 दिसम्बर को आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एक ओर विभिन्न अध्ययनों में स्वदेशी वैक्सीन को प्रभावी पाया गया, वहीं कई लोगों ने इसकी इसलिए आलोचना की, क्योंकि इसे देश में बनाया गया था। कुछ ने इसके खिलाफ डब्ल्यूएचओ से भी शिकायत की थी।
न्यायमूर्ति रमण ने अपने लोगों की महान उपलब्धियों के बावजूद उन्हें कम आंकने की प्रवृत्ति को गुलामी की मानसिकता बताते हुए इसे त्यागने को कहा। उन्होंने, माँ, मातृभाषा और मातृभूमि के सम्मान को जारी रखने पर जोर दिया।

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