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प्राचीन भारत के रहस्य खोल रहे हैं आज के वैज्ञानिक

महाभारत में कौरवों के जन्म का एक विचित्र विवरण मिलता है। महामुनि वेदव्यास के अनुसार माता गान्धारी के गर्भ से एक माँस-पिण्ड निकला। हस्तिनापुर के राजवैद्य ने उस पिण्ड के सौ टुकड़े कर सौ पात्रों में औषधियुक्त घी में रख दिये। साल भर बाद उन पात्रों में सौ शिशुओं का जन्म हुआ। ये ही सौ कौरव कहलाये। आधुनिक युग के भारत के ‘ज्ञानी’ इस विवरण को हास्यास्पद मान कर इसका उपहास करते हैं। पिछले दिनों भारत के ही एक विद्वान ने बताया कि ‘स्टेम-सेल प्रक्रिया’ के अन्तर्गत जैसे टेस्ट-ट्यूब-बेबी उत्पन्न किये जाते हैं, उसी प्रकार कौरवों का जन्म हुआ।
गत 3 से 7 जनवरी तक जलंधर में पाँच दिनों की भारतीय विज्ञान कांग्रेस प्रारम्भ हुई। इसमें नोबुल पुरस्कार विजेता छह वैज्ञानिकों सहित देश-विदेश के तीस हजार वैज्ञानिकों ने भाग लिया। जलंधर के पास फगवाड़ा के लवली प्रोफेशनल विश्‍व विद्यालय में यह आयोजन हुआ था। विज्ञान कांग्रेस में सभी देशों के वैज्ञानिक नई शोधों की जानकारी देते हैं। कांग्रेस के दूसरे दिन विशाखापट्टम स्थित आंध्र वि.वि. के कुलपति प्रो.जी.नागेश्‍वर राव ने कौरवों के सम्बन्ध में उक्त जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विज्ञान में प्राचीन भारत ने आश्‍चर्यजनक प्रगति की थी। लेसर तकनीक से लक्ष्य का पीछा करने वाली मिसाइलें रामायण काल में प्रचलित थीं। श्रीराम जो अस्त्र चलाते थे वह लक्ष्य का पीछा करता था और वार कर वापस भी आ जाता था।
श्री नागेश्‍वर राव ने एक और चकित करने वाली जानकारी देते हुए कहा कि रावण की लंका में कई स्थानों पर हवाई अड्डे बने हुए थे और रावण के पास पुष्पक विमान सहित चौबीस प्रकार के विमान थे।
डा.नागेश्‍वर राव की इस टिप्पणी के साथ ही कुछ सेकुलरवादियों ने बवाल खड़ा कर दिया। सेकुलरवादी इतने असहिष्णु हैं कि विपरीत ‘विचार’ को वे सहन ही नहीं कर पाते। भारत की महानता की बात उठते ही ये परेशान हो जाते हैं।

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