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तो देश का एक शत्रु बढ़ जाता है

स्वामी विवेकानन्द, बेलूर मठ के निकट गंगा के रामकृष्ण घाट पर एक नौका में बैठे थे। ‘प्रबुद्ध भारत’ समाचार पत्र के एक संवाददाता से उनकी बात हो रही थी। संवाददाता ने प्रश्‍न किया- “ स्वामीजी जिन लोगों ने हिन्दू धर्म छोड़ दिया है उन्हें फिर से हिन्दू धर्म में लाने के विषय में आपका क्या मत है?”
स्वामीजी ने उत्तर दिया-“अवश्य, उनको अवश्य लाया जा सकता है और लाना भी चाहिये। फिर यह भी बात है कि किसी एक व्यक्ति के हिन्दू समाज को त्याग देने पर इस समाज का एक व्यक्ति केवल कम ही नहीं हो जाता बल्कि उसके शत्रु की संख्या में एक की वृद्धि भी होती है।”
यह पूरा साक्षात्कार ‘प्रबुद्ध भारत’ में अप्रेल 1899 में प्रकाशित हुआ था। स्वामी विवेकानन्द समग्र (अंग्रेजी) के खण्ड 5 में पृष्ठ 233 पर यह वार्ता शामिल की गई है।
यानी कोई हिन्दू ईसाई या मुसलमान बन जाता है तो देश से एक हिन्दू ही कम नहीं होता, देश और समाज का एक शत्रु भी बढ़ जाता है। गत आठ सौ सालों का इतिहास इसी सचाई को चिल्ला-चिल्ला कर प्रकट कर रहा है। हाल ही में इसका एक प्रत्यक्ष उदाहरण सामने आया है। गत 10 जुलाई को समाचार पत्रों और दू.द.वाहिनियों में समाचार आया कि कश्मीर में संदीप शर्मा नाम का लश्करे तोईबा का आतंकी पकड़ा गया है। इसी के साथ सेकुलर गठजोड़ ने फिर ‘भगवा आतंक” का राग अलापना शुरु कर दिया। पर दो दिन बाद पूरे मामले की सचाई सामने आ गई।
प्रेम जाल में फँसा- मुजफ्फर नगर का रहने वाला दसवीं पास संदीप शर्मा अपराधी स्वभाव का था। पाँच साल पहले वह काम की तलाश में कश्मीर गया। उसके साथ योगेश और आसिफ भी थे। वहाँ वह वेल्डिंग का काम करने लगा। इसी बीच वह एक कश्मीरी मुस्लिम लड़की के प्रेम जाल में फँस गया। लड़की का बाप पुलिस की नौकरी में थानेदार था तथा कुछ समय पहले ही सेवा निवृत्त हुआ था। लड़की के घर वालों ने शर्त रखी कि संदीप मुसलमान बने तभी विवाह हो सकता है। यह ‘लव-जिहाद’का दूसरा रूप है। प्रेम जाल में फँसा संदीप मुसलमान बन गया और उसका नाम आदिल हो गया ।
प्रणेश से गुलाम शेख- आदिल ने शादी तो कर ली पर वेल्डिंग से उसे खास आमदनी नहीं हो रही थी। कुछ दिनों बाद लश्करे-तोइबा का आतंकी शकूर उससे मिला और उसे अपने गिरोह में शामिल कर लिया। संदीप शर्मा से जो आदिल बन गया था अब लश्करे तोइबा के गिरोहबाजों के साथ बैंक लूटने लगा और भारतीय सेना के जवानों पर हमला करने लगा। एक हिन्दू कम होने के साथ इस तरह देश का एक शत्रु बढ़ गया। ऐसे अनेक उदाहरण हैं। सन् 2004 में आतंकी इशरतजहाँ पुलिस मुठभेड़ में मारी गई थी। उसके साथ जावेद गुलाम शेख नाम का आतंकी भी मारा गया । वह
भी पहले हिन्दू था और उसका नाम प्रणेश पिल्लै था। वह भी
मुस्लिम लड़की के प्रेम-जाल में फँस कर मुसलमान बन गया। इसी के साथ वह देश का शत्रु भी बन गया।
चित भी मेरी पट भी मेरी- इन घटनाओं से एक और बात भी स्पष्ट होती है। लव-जिहाद में जिहादी नौजवान षड़यंत्रपूर्वक हिन्दू कन्याओं को प्रेम-जाल में फँसाते हैं। परिणाम यह होता है कि लड़की को मुसलमान बनना पड़ता है और फिर उसका निकाह हो जाता है। कुछ घटनाओं में मुस्लिम लड़कियाँ भी योजनापूर्वक हिन्दू युवकों को प्रेमजाल में फँसाती हैं। तब भी हिन्दू युवक को ही मुसलमान बनना पड़ता है। लड़का हो या लड़की मुस्लिम समुदाय या किसी कन्या का युवक से सम्बन्ध बनाने पर उसी को इस्लाम स्वीकार करना पड़ता है। ऐसा उदाहरण एक भी नहीं है कि कोई जिहादी युवक या युवती किसी हिन्दू से विवाह कर हिन्दू बने हों। यह पूरी तरह एक-तरफा प्रवाह है।
सेकुलर गठजोड़ को निराशा- संदीप शर्मा उर्फ आदिल की सचाई सामने आने पर सेकुलर-लिबरल-नक्सल गठजोड़ को भारी निराशा हुई। हिन्दू या भगवा आतंक का हौवा खड़ा करने का एक स्वर्ण अवसर उनके हाथ से निकल गया। दो-तीन दिनों तक मीडिया में ‘हिन्दू आतंकवाद’ की हू-हू होती रही, फिर जब सचाई सामने आई तो गठजोड़ ने चुप्पी साध ली। केवल हिन्दी के ही गिने-चुने समाचार पत्रों ने सचाई बताई और लव-जिहाद की निन्दा की।

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