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गो-उत्पीड़न के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर बने कानून

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गो-तस्करी की घटनाओं पर राज्य सरकार मौन क्यों?

राजस्थान में गो-तस्करी, गो-हत्या तथा गो-रक्षकों पर प्राण घातक हमले की घटनाएं निरंतर एक के बाद एक सामने आ रही हैं। आज पूरे प्रदेश में निडर होकर जिस तरह से गो-तस्कर अपनी गतिविधियां चला रहे हैं उससे तो लगता है कि न उन्हें पुलिस का भय है और न ही प्रशासन का।
ताजा घटनाक्रम भिवाड़ी (अलवर) का है जहाँ 24 नवम्बर को बाइक पर 45 किलो गो-मांस ले जाते 2 युवकों को पुलिस ने गश्त के दौरान पकड़ा। गिरफ्तार आरोपी जुनेद मेव पुत्र खालिद एवं असलम मेव पुत्र नसरुद्दीन तिजारा के बेरला गाँव के निवासी हैं।
भिवाड़ी एसपी श्री राममूर्ति जोशी ने बताया कि दोनों युवकों के मोटर साइकिल पर गो-मांस लेकर मालियर जट्ट की तरफ से हसनपुरमाफी जाने की सूचना पर नाकाबंदी की गई। जब तलाशी ली गई तो प्लास्टिक के कट्टे में 45 किलो मांस मिला। अधिकृत पशु चिकित्सक डॉ. विनोद यादव ने इसके गो-मांस होने की पुष्टि की है।
गो-तस्करी की कुछ अन्य घटनाएं
विगत कुछ ही दिनों में गो-तस्करी व गो-हत्या के अनेकों मामले सामने आए हैं। देखें-
- मालपुरा (टोंक) में निर्दयता से ठूँसकर कंटेनर में भरे गए 53 गो-वंश को मुक्त कराया गया। 2 गो-वंश मृत पाए गए।
- बोली (सवाईमाधोपुर) में 75 गो-वंश से भरा ट्रक पकड़ा, जिन्हें काटने के लिए इंदौर ले जाया जा रहा था।
- प्रतापगढ़ में एक ट्रक से 51 गो-वंश को मुक्त कराया गया। जिसमें एक गोवंश की दम घुटने से मृत्यु ।
- आबूरोड़ (सिरोही) में 39 गो-वंश से भरा एक कंटेनर पकड़ा गया। 4 गो-तस्कर गिरफ्तार।
- पेच बावड़ी (बूंदी) में मिनी ट्रक से गोकशी को ले जाते 10 गो-वंश पकड़े व मुक्त कराए गए।
- दूनी (टोंक) में गो-सेवा दल द्वारा गो-तस्करों के कब्जे से अनेक गायों को मुक्त कराया गया।
- रामगढ़ (अलवर) में मालपुरा के पास गो-तस्करों से 14 गोवंश को मुक्त कराया गया। वहीं नीमराना में गो-तस्करी के दौरान खाई में गिरे वाहन को गो-तस्करों ने आग लगा दी।
- खोह (भरतपुर) में एक गाड़ी में 2 गो-वंश जीवित तथा 1 मृत पाया गया। उक्त घटना में 2 गो-तस्करों की गिरफ्तारी हुई। वहीं डीग टोडा क्षेत्र से गो-वंश ले जाते सम्मा और मुनफैग नामक दो गो-तस्करों को पकड़ा। उनकी गाड़ी से 18 गो-वंश मुक्त कराए गए।
- खेतड़ी (झुंझुनूं) में पिछले दिनों एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ जिसमें 3 युवक एक गाय और बैल को मशाल से जलाते हुए दिख रहे हैं।
ये वे मामले हैं जो मीडिया के सामने आए हैं या कानूनी रूप से दर्ज हुए हैं जबकि वास्तविक आंकड़े निश्चित रूप से इससे अधिक होंगे। वो तो भला हो गो-रक्षा कार्य से जुड़े कार्यकर्ताओं और जागरूक ग्रामीणों का जिनके कारण उक्त मामले सामने आ पाए हैं। गो-तस्करी और गो-उत्पीड़न की घटनाओं में आखिरकार वृद्धि क्यों होती जा रही है?
विडंबना यह है कि राज्य सरकार तुष्टिकरण में डूबकर गो-हत्या और गो तस्करी पर आँखें मूंदे बैठी है। इतना ही नहीं, गो-रक्षा करते हुए तस्करों की गोलियों का शिकार होने वाले गो-रक्षकों पर ही उलट मुकदमे दर्ज कर दिए जाते हैं। इसलिए जरूरी है कि गो-उत्पीड़न के विरुद्ध राष्ट्रीय स्तर पर कठोर कानून बने जिसमें दोषियों को कठोरतम दण्ड की व्यवस्था हो।
मध्य प्रदेश सरकार ने गो-उत्पादों को बढ़ावा देते हुए राज्य के सरकारी कार्यालयों में गो-फिनाइल से सफाई करने के आदेश दिए हैं साथ ही प्रदेश में दो हजार से अधिक गो-शालाएं बनाने का निर्णय भी लिया है। अन्य राज्य सरकारों को भी गो-संरक्षण की दिशा में इस तरह के कदम उठाने की आवश्यकता है।

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