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गुरु गोबिन्द सिंह के पुत्रों की याद में मने बाल दिवस

पूरे देश में 14 नवम्बर को बाल-दिवस मनाया जाता है। देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु का जन्म-दिवस इसी दिन आता है। इस बार बाल-दिवस पर ‘दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमीटी’ ने माँग की है कि दशम् गुरु गोबिन्द सिंह जी के पुत्रों के नाम पर भी बाल-दिवस मनाया जाना चाहिये।
यह माँग उचित ही है और प्रत्येक देशवासी इसका समर्थन अवश्य करेगा। गुरु गोबिन्द सिंह के चार पुत्र थे और चारों देश और धर्म की रक्षा के लिये बलिदान हो गये। अठारह वर्ष के अजीत सिंह और जुझार सिंह ने चमकौर के संग्राम में असाधारण शौर्य दिखा कर वीरगति प्राप्त की। लगभग उन्हीं दिनों नौ साल के जोरावर सिंह और सात वर्ष की आयु में फतेह सिंह की सरहिंद के नवाब ने जीवित ही दीवार में चिनवा दिया। दोनों सिंह शावकों ने मुसलमान बनने से इन्कार कर दिया था। दोनों वीर बालक खड़े थे और उनके चारों और ईंटें लगाई जा रहीं थीं। दीवार जब गले तक आ गई तो अजीतकी आँखों से आँसू निकल आये। सात साल के फतेह सिंह ने तुरंत पूछा -“ भैया यह क्या तुम्हारे मन में अंतिम क्षणों में कमजोरी कैसे आ गई?”
इस पर अजीत ने कहा- “ तू मुझसे छोटा है पर देश धर्म के लिये मुझसे पहले बलिदान हो रहा है। बड़ा होने के नाते पहले मुझे बलिदान होना चाहिये था। ये आँसू इसी बात के हैं।”
पूरी दुनिया में क्या और कोई ऐसा उदाहरण है? भारत में तो धु्रव और प्रह्लाद से लेकर वीर अभिमन्यु, हकीकत राय तथा महावीर बादल तक ऐसे अनेक उदाहरण हैं। लेकिन गुरु गोबिन्द सिंह के साहबजादों का बलिदान तो अप्रतिम है। इसलिये उनकी स्मृति में बाल-दिवस अवश्य आयोजित होना चाहिये और उसमें भारत के सभी वीर बालकों की गाथाएं सुनाई जानी चाहिये।

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