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गीता अब उर्दू भाषा और देवनागरी लिपि में

गीता प्रेस गोरखपुर ने श्रीमद्भगवद्गीता को उर्दू और देवनागरी में प्रकाशित किया है। इसमें संस्कृत के श्‍लोको का अनुवाद उर्दू भाषा में है, साथ ही अनुवाद की लिपि देवनागरी है। यह इसलिये किया गया है कि उर्दू बोलने वाले जो लोग उर्दू लिपि नहीं पढ़ सकते वे देवनागरी में पढ़ कर गीता को समझ लें।
उर्दू भाषा और लिपि में गीता का प्रकाशन वर्ष 2002 में हुआ था। इसकी दस हजार प्रतियाँ अब तक बिक चुकी हैं। अभी भी इसकी काफी माँग है। उर्दू के अतिरिक्त संस्कृत, अंग्रेजी, बंग्ला, मराठी, गुजराती, तमिल, तेलगू, कन्नड़, मलयालम, उड़िया, असमिया तथा गुरुमुखी में भी गीता छप चुकी है। ये सभी गीता प्रेस में ही छपी हैं। गोरखपुर की अद्भुत प्रेस से पन्द्रह भाषाओं में भारतीय ज्ञान की पुस्तकें प्रकाशित होती हैं। यह विश्‍व का एकमात्र संस्थान है जो बहुत ही कम मूल्य पर पुस्तकें प्रकाशित करता है। गीता प्रेस, गोरखपुर की एक विशेषता यह भी है कि किसी भी प्रकार का अनुदान यहाँ नहीं लिया जाता । पुस्तकों या ‘कल्याण’ जैसी पत्रिकाओं में कोई विज्ञापन भी स्वीकार नहीं किया जाता।

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