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एक महीने घर-घर में होती है रामकथा

केरल में भारी वर्षा के बीच हर घर में एक महीने तक राम-कथा आयोजित की जाती हैं। एक महीने के इस वार्षिक आयोजन को करक्कडकम कहा जाता है। महर्षि वाल्मीकि की रामायण का प्रसिद्ध कवि युंचत एजूथच्चन ने मलयालम में अनुवाद किया है। यह अनुवाद अध्यात्म-रामायण के नाम से प्रसिद्ध है। इसी का पाठ केरल में होता है। मानसून के कारण फैलने वाली बीमारियों तथा अन्य नुकसानों से बचने के लिये अध्यात्म-रामायण का पाठ किया जाता है। इस बार गत 15 जुलाई से राम-कथा के माह करक्कडकम का प्रारम्भ हुआ तथा 14 अगस्त तक घर-घर में प्रभु श्रीराम के गुणों का बखान होगा।
विशेष बात यह है कि इस बार केरल के वाममार्गी भी इन आयोजनों में भाग ले रहे हैं। 15 जुलाई से शुरु हुए रामायण-महीने में कामरेड भी श्रीराम का नाम ले रहे हैं। कामरेडों का एक जेबी संगठन ‘सांस्कृतिक संगम’ स्थान-स्थान पर श्रीराम पर भाषण आयोजित करवा रहा है। हो सकता है कि राम के नाम से वाममार्गियों का भी उद्धार हो जाये। अजामिल तक का उद्धार नारायण का नाम लेने से हो गया तो कामरेडों का क्यों नहीं हो सकता?
एक बात इस संदर्भ में और कही जा सकती है, कि लौट के बुद्धू घर को आये।

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