layout

wide boxed

direction

ltr rtl

style

light dark

skins

default alimbalmarina somnambula juicy spoonflower goats nutricap keratin vit courtly attire mondrian sage walking by

bg pattern

1 2 3 4 5 6 7 8

bg image

1 2 3 4 5 6 7 8

आतंकी की फाँसी रुकवाने की अपील करने वाले नसीर फिर डरे

याकूब मेमन एक दुर्दान्त आतंकवादी था तथा 1993 के मुम्बई धमाकों में लिप्त था। 30 जुलाई 2015 को उसे नागपुर में फाँसी पर लटका दिया गया। फाँसी से पहले चालीस ‘ज्ञानियों’ ने याकूब मेमन की फाँसी माफ करने की अपील की थी। जो अपराधी मुम्बई के सिलसिलेवार धमाकों में तीन सौ लोगों की मौत और अरबों रुपयों की सम्पत्ति नष्ट करने का जिम्मेदार था उसके लिये माफी की माँग इन चालीस तथाकथित बुद्धिजीवियों ने की थी। इनमें मणिशंकर अय्यर, कामरेड सीताराम येचुरी, प्रकाश करात, वृंदा करात, वकील प्रशांत भूषण, फिल्म अभिनेता शाहरुख खान, आमिर खान,सलमान खान, सैफ अली खान, अरविंद केजरीवाल आदि के अतिरिक्त प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान अध्यक्ष भी थे। अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी उनमें से एक थे। कुछ दिनों पहले आतंकी के साथ खड़े होने वाले नसीर को भारत में ‘डर’ लगा था। गत 4 जन. को उन्होंने फिर से भयभीत होने की बात कही।
तथाकथित मानवाधिकारी संगठन एम्नेस्टी को दिये एक साक्षात्कार में श्री शाह ने कहा कि “अभिनेता, कलाकार, कवि, पत्रकार, विद्वानों आदि का गला घोंटा जा रहा है। मजहब के नाम पर घृणा की दीवारें खड़ी की जा रही हैं। निर्दोषों को मारा जा रहा है।... देश में कानून का शासन नहीं अंधकार है।”
(टाइम्स ऑफ इण्डिया 5 जन.19)
जनाब नसीरुद्दीन शाह ने यह खूब कहा। आपातकाल में उन्हें नहीं लगा कि पत्रकार, राजनेता,छात्र, कवि आदि का गला घोंटा जा रहा है। कश्मीर सें पडितों को मार-मार कर भगाया गया तब उन्हें नहीं महसूस हुआ कि मज़हब के नाम पर जिहादी घृणा की दीवार खड़ी कर रहे हैं। गोधरा में एक डिब्बे में बैठे राम-भक्तों को जीवित जला दिया गया उस समय उन्होंने नहीं कहा कि देश में कानून का शासन नहीं अन्धकार है।
मुम्बई में 1993 में सिलसिलेवार बम धमाके हुए, फिर ट्रेनों में बम धमाके हुए जयपुर सहित अनेक नगरों में बम-विस्फोट हुए उस समय तो वे डरे नही और अब जब देश सुरक्षित है , दुनिया की आर्थिक और सैनिक महाशक्ति बनने की ओर है तो श्रीमान् डरे हुए हैं।
वास्तव में यह सब राजनैतिक ड्रामा है। लोकसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं और अभी कई ‘ज्ञानी’ भयभीत होंगे, पुरस्कार वापस करेंगे, मोमबत्तियाँ हाथ में लेकर और मुँह पर रूमाल बाँध कर जुलूस निकालेंगे।

© 2016 All rights reserved. Patheykan Theme by eCare SofTech Pvt Ltd