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आजादी-गिरोह की घोर तानाशाही

दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विश्‍वविद्यालय में ‘आजादी-आजादी’ के नारे लगाते हुए सभी देशवासियों ने देखे है। बंगाल के जाधवपुर विवि में भी इस प्रकार के नारे लगाये जाते हैं। सेकुलरवादियों से जुड़ा छात्रों का एक गिरोह है जो देश के टुकड़े करने और आजादी का शोर मचाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह गिरोह दूसरों को अपनी बात रखने की आजादी बिल्कुल नहीं देता। सेकुलर-लिबरल-नक्सल गठजोड़ विचार प्रकट करने की पूरी आजादी के नारे ही लगाता है लेकिन अपने से भिन्न विचार रखने वालों से निपटने के लिये हिंसा का सहारा लेता है।
जाने-माने फिल्मकार श्री सुदीप्तो सेन ने एक फिल्म ‘इन द नेम ऑफ लव’ बनाई है। इसमें केरल में चल रहे लव-जिहाद तथा मतांतरण को दिखाया गया है। कुछ समय पूर्व इस फिल्म को जनेवि में भी दिखाना तय किया गया। यह समाचार मिलते ही आजादी-गिरोह सक्रिय हो गया। विश्‍वविद्यालय के साबरमती ढाबे पर सायं 6 बजे फिल्म दिखायी जानी थी। उसी समय वर्तमान छात्र संघ अध्यक्ष तथा पूर्व अध्यक्ष के साथ छात्रों की एक भीड़ वहाँ आ गई। आते ही उन्होंने मार-पीट शुरु कर दी तथा प्रोजेक्टर से फिल्म की रील ही निकाल ली। हिंसा में एक सुरक्षाकर्मी का पैर टूट गया। यह इसलिये किया गया कि फिल्म में जिहादियों के लव-जिहाद षड़यंत्र से पर्दा उठाया गया है।
इसके पहले श्री विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘बुद्ध इन ए ट्रेफिक जाम’ के प्रदर्शन पर भी जनेवि और जाधवपुर विवि. में नक्सलवादी छात्रों ने बवण्डर खड़ा कर दिया। इस अनुभव को लिपि-बद्ध करते हुए विवेक अग्निहोत्री ने एक पुस्तक अर्बन नक्सल्स लिखी है, जिसका लोकार्पण गत 27 मई को दिल्ली के विज्ञान भवन में किया गया। उक्त फिल्म 13 मई 2016 को प्रदर्शित की गई थी और इसमें नक्सलियों की असलियत बताई गई है।
इसी तरह बंगाल में मिलन भौमिक की फिल्म दंगा पर अघोषित रोक लगा दी गई है। 16 अगस्त 1946 के दिन मुस्लिम लीग के लफंगों ने कोलकाता में हिन्दुओं का जो नरसंहार किया था, उसे फिल्म में दिखाया गया है। फिल्म बंगला भाषा में है और जिहादियों ने सिनेमाघर मालिकों को धमका कर फिल्म का प्रदर्शन नहीं होने दिया। आश्‍चर्य की बात है कि अभिव्यक्ति की आजादी के पक्ष में खड़े रहने वाले मीडिया ने उक्त घटनाओं को महत्व ही नहीं दिया। मीडिया का पक्षपात भी इससे उजागर हुआ।

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