layout

wide boxed

direction

ltr rtl

style

light dark

skins

default alimbalmarina somnambula juicy spoonflower goats nutricap keratin vit courtly attire mondrian sage walking by

bg pattern

1 2 3 4 5 6 7 8

bg image

1 2 3 4 5 6 7 8

अंतिम संस्कार में गोकाष्ठ का प्रयोग

प्राचीन काल से ही गाय भारत की अर्थव्यवस्था का आधार रही है। इसीलिए गाय को माता कहा गया है। देशी गाय का दूध अमृत के समान होता है। इसमें कई रोगों के उपचार करने की क्षमता होती है। गो-मूत्र भी औषधियों का भण्डार माना गया है। गाय का महत्व अधिक से अधिक समझ में आये इसके लिए झारखण्ड के धनबाद की ‘गंगा गोशाला’ ने एक नया प्रयोग प्रारम्भ किया है।
यह गोशाला गाय के गोबर से गोकाष्ठ बना रही है जिसका उपयोग अंतिम संस्कार में किया जा रहा है। दाह संस्कार में लकड़ी की जगह
गोबर से तैयार गोबरी (गोकाष्ठ)के उपयोग से गो माता से प्राप्त गोबर की उपयोगिता बढ़ी है।
ऐसे तैयार होती है गोबरी- ईंट के साँचे में गाय के गोबर को डालकर इसे 15 दिनों तक सूखने के लिए रख देते हैं। जब यह अच्छी तरह से सूख जाता है तो इसे साँचे से बाहर निकाल लिया जाता है। इस तरह तैयार गोकाष्ठ (गोबरी) का अंतिम संस्कार में उपयोग किया जाता है।
जो गायें दूध नहीं देतीं उनके गोबर और गोमूत्र से ही उनके रख-रखाव में होने वाला व्यय निकाला जा सकता है। इनका उपयोग खेती के साथ-साथ अनेक औषधियों के निर्माण में भी हो रहा है। अब अंतिम संस्कार में भी गोकाष्ठ का उपयोग हो रहा है।

© 2016 All rights reserved. Patheykan Theme by eCare SofTech Pvt Ltd