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अभाप्रस की बैठक नागपुर में सम्पन्न

अभाप्रस की बैठक नागपुर में सम्पन्न
24 Aug

अभाप्रस की बैठक नागपुर में सम्पन्न

भैय्या जी जोशी पुनः सरकार्यवाह निर्वाचित
एक भाव, एक संकल्प लिये जहाँ स्थान-स्थान से लोग एकत्र होते हैं, उसे अपने देश में तीर्थ-स्थल माना जाता है। नागपुर भी ऐसा ही एक तीर्थ बन गया है। यहाँ सम्पूर्ण देश के कोने-कोने से समान विचार, समान श्रद्धा और समान समर्पण का भाव लिये लोग एकत्रित होते हैं। पहला अवसर होता है संघ के तृतीय वर्ष के शिक्षण का, जब चुने हुए कार्यकर्ता नागपुर के रेशिम बाग स्थित डा. हेडगेवार स्मृति मंदिर में इकट्ठे होते हैं, पचीस दिनों तक एक साथ रहते हैं,

बोलते हैं, चलते हैं और राष्ट्र-सेवा का संकल्प लेते हैं। दूसरा अवसर अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक का होता है जब विविध क्षेत्रों में कार्य कर रहे सम्पूर्ण देश के कर्मयोगी तीन दिनों के लिये रेशिम बाग के तपस्या-स्थल पर जुटते हैं। अद्भुत दृश्य होता है, जब सुदूर अरुणाचल, असम, मणिपुर से लेकर जम्मू-कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, उड़ीसा, केरल, तमिलनाडु आदि के एक दूसरे की भाषा नहीं पर भाव समझने वालों का समागम होता है।

पहले यह अ.भा.प्र.स. बैठक प्रति वर्ष नागपुर में होती थी, पर अब केवल चुनावी वर्ष अर्थात् तीन साल में एक बार ही इस तीर्थ-स्थल पर होती है। इस बार गत 13,14 और 15 मार्च को यह बैठक स्मृति मंदिर के महर्षि व्यास सभागार में सम्पन्न हुई। इसमें श्री सुरेश (भैय्या जी) जोशी पुनः तीन वर्षों के लिये सरकार्यवाह चुने गये। पूरे देश से आये प्रमुख कार्यकर्ताओं से विचार-विमर्श के अतिरिक्त अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस तथा मातृभाषा में शिक्षा से सम्बन्धित दो प्रस्ताव भी पारित किये गये। पुनः निर्वाचन से पूर्व सरकार्यवाह भैया जी जोशी ने वर्ष भर की गतिविधियों का लेखा-जोखा प्रतिवेदन के रूप में प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन के अनुसार पूरे देश में संघ-शाखाओं की आशातीत वृद्धि हुई है। पूरे देश में 33222 नगर , ग्राम और कस्बों में 51330 शाखाएं हैं। इनके अतिरिक्त 21855 स्थानों पर स्वयंसेवक हर सप्ताह सम्पर्क करते रहते हैं। इस प्रकार 55077 नगर, ग्राम व कस्बों में संघ की स्थायी पहुँच हो चुकी है। संघ शिक्षा वर्गों में प्रशिक्षण लेने वालों की संख्या भी बढ़ी है तथा स्वयंसेवकों के माध्यम से चल रहे सेवा कार्य भी एक लाख से अधिक हो चुके हैं।

प्रतिवेदन में सबसे पहले गत एक वर्ष में दिवंगत हुए श्रेष्ठजनों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई। रेल दुर्घटना में अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए जयपुर के प्रचारक श्री तरुण कुमार को भी श्रद्धा सुमन अर्पित किये गये।

गत एक वर्ष में हुए प्रमुख कार्यक्रमों का उल्लेख करते हुए भैय्या जी ने सावधान किया कि,

“ अराष्ट्रीय शक्तियाँ कुण्ठित होकर अनावश्यक बातों की चर्चा का मुद्दा बना कर वातावरण दूषित करने का प्रयास करती रहती हैं। देशवासी इस संदर्भ में सजग रहे।” इसी के साथ उन्होंने देश भर से आये प्रतिनिधियों का आह्वान किया कि,

“दृढ़तापूर्वक सब मिल कर आगे बढ़ें, जीवन के सभी क्षेत्रों में अपने विचारों का प्रभाव स्थापित करते हुए समाज की सृजनात्मक शक्ति को विश्‍व के सम्मुख प्रस्तुत करें।”

पुननिर्वाचित सरकार्यवाह ने अपनी कार्यकारिणी की जानकारी भी प्रतिनिधियों को दी। इस बार एक और सह-सरकार्यवाह का पद बढ़ाया गया है और श्री भागय्या को यह दायित्व दिया गया है।

सामाजिक समरसता के लिये जुटें- सरसंघचालक भागवत जी ने प्रतिनिधि सभा बैठक के समापन पर कार्यकर्ताओं से कार्यक्षम और सर्वव्यापी होने का आग्रह किया। अनुकूल परिस्थिति का पूरा लाभ उठाते हुए तेजी से आगे बढ़ने की आवश्कयता उन्होंने बताई। इसी के साथ उन्होंने अपने परिवार को संस्कारित करने तथा सामाजिक समरसता के लिये पूरी शक्ति से कार्य करने का संदेश दिया। समाज-संगठन के राष्ट्रीय कार्य में लगे कार्यकर्ता अपने घर-परिवार की उपेक्षा करते हैं। इसलिये पूरे समाज को संगठन का आह्वान करने वाले कार्यकर्ता का अपना परिवार बिखर जाता है, अनेक विसंगतियाँ उसमें उत्पन्न हो जाती हैं। अपने स्वयं के परिवार को संस्कारित करना इसीलिये आवश्यक है। सरसंघचालक जी ने जोर दिया कि प्रत्येक स्वयंसेवक के परिवार में साप्ताहिक सत्संग अवश्य होना चाहिये। इसी प्रकार सामाजिक समरसता को भी प्रत्यक्ष जीवन में उतारने का आग्रह भागवत जी ने किया।

प्रतिनिधि सभा की बैठक में ही उदयपुर के पैसेफिक विश्‍वविद्यालय के कुलपति डा. भगवती प्रकाश को उत्तर-पश्‍चिम क्षेत्र (राजस्थान) का संघचालक निर्वाचित किया गया

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