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पाथेय कण के बारे में

पाथेय कण के बारे में

वर्ष-प्रतिपदा विक्रम संवत् 2042 के प्रारम्भ में अर्थात् अप्रेल 1985 से पाथेय का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इसका प्रथम अंक 8 पृष्ठों का था तथा इसके मुख पृष्ठ पर संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार का चित्र था। प्रथम अंक की 500 प्रतियाँ छपाई गई थीं।

प्रकाशन के पहले वर्ष में ‘पाथेय’ के कुल दस अंक प्रकाशित हुए। ‘पाथेय’ नाम पहले से ही पंजीकृत होने पर पाथेय के आगे ‘कण’ लगाकर प्रार्थना-पत्र आर.एन.आई. को प्रेषित किया गया। अक्तूबर 1987 में आर.एन.आई. से ‘पाथेय कण’ नाम स्वीकृत हुआ। इस प्रकार पाथेय कण नाम से पहला अंक दिसम्बर 1987 में प्रकाशित हुआ। जुलाई 1988 में इसका डाक पंजीकरण हुआ। वर्ष 1989 का अगस्त अंक प्रथम बार 20 पृष्ठों का छपा।

वास्तव में 1989 से 1991 तक के तीन वर्ष पाथेय-कण के इतिहास का महत्वपूर्ण समय था। इन तीन वर्षों में पाथेय कण की प्रसार संख्या भी क्रमशः बढ़ने लगी। अक्तूबर 1991 का अंक पाथेय कण के विशेषांक की श्रृंखला का पहला विशेषांक था। यह शक्तिपूजा विशेषांक 68 पृष्ठों का था। 1992 के प्रारम्भ में पाथेय कण को (पाक्षिक) कर इसका वार्षिक शुल्क 25 रुपये तथा आजीवन शुल्क 250 रुपये तय किया गया। अप्रेल-1992 का अंक पाक्षिक के रूप में प्रथम अंक था। यह अंक भी 20 पृष्ठों का ही था।

पाक्षिक होने के साथ ही इसकी प्रसार संख्या भी बढ़ने लगी। वर्ष 1992 में प्रसार संख्या 35,000 थी। वर्ष 2005 में प्रसार संख्या शिखर पर पहुँच कर 1 लाख 72 हजार हो गई। घटत-बढ़त के बीच इस समय इसकी 1 लाख 52 हजार प्रतियाँ छपती हैं। 8 अगस्त 2016 में पाथेय कण कार्यालय मालवीय नगर स्थित अपने नवीन भवन में आया।

कृतज्ञ

अपने सांस्कृतिक मूल्यों और परम्पराओं के लिये ख्यात राजस्थान का इतिहास भी गौरवशाली रहा है। इन मूल्यों तथा परम्पराओं की झलक जयपुर से प्रकाशित पाक्षिक पाथेय कण में महसूस की जा सकती है।

शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश

लोगों की समस्याओं को उजागर करने के साथ-साथ समाज के विकास की बातों को भी लोगों के सामने रख कर जन-जन में राष्ट्रीय, सामाजिक और धार्मिक चेतना जगाना और सुदृढ़ बनाने का उत्तरदायित्व अखबार और मीडिया का बनता है।पाथेय जन-जन में भेदभाव रहित धार्मिकता , सामाजिकता एवं राष्ट्रीयता को जाग्रत करने में सफल हो।

नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री भारत सरकार

पाथेय कण अपने संक्षिप्त कलेवर में मानव जीवन की धन्यता के लिए नितान्त आवश्यक दक्षता के साथ सुदीर्घकाल से सुदीर्घक्षेत्र में परोस रहा है, जो अत्यन्त प्रशंसनीय है। धर्म-अध्यात्म-राष्ट्रीयता-स्वदेशी जागरण- भारतभूमि का गौरव इत्यादि अनेक मांगलिक पाथेय कणों का निरन्तर प्रवाह राष्ट्र के लिए गौरव की बात है। पाथेय कण की यह यात्रा परममांगलिक हो, विराट् हो तथा चिरस्थायी भी हो, इसी सद्भावना के साथ परमप्रभु श्रीरामजी के श्रीचरणों में प्रार्थी हूँ।

स्वामी रामनरेशाचार्य

पाथेय कण राजस्थान के हिन्दू समाज को गत 30 वर्ष से भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय जागरण और धर्म के संस्कार देने का उदात्त काम कर रहा है। जनता को जाग्रत करना वहीं सबसे बड़ा सामाजिक परिवर्तन का आधार है और पाथेय कण इतनी बड़ी संख्या में राजस्थान की धर्म एवं राष्ट्र रक्षा की परम्परा जाग्रत कर रहा है। पाथेय कण राजस्थान के हर गांव और हर परिवार तक पहुँचे यही अभ्यर्थना व्यक्त करता हूँ।

डॉ. प्रवीण भाई तोगड़िया

पाथेय कण में स्वागत है.

वर्ष-प्रतिपदा विक्रम संवत् 2042 के प्रारम्भ में अर्थात् अप्रेल 1985 से पाथेय का प्रकाशन प्रारम्भ हुआ। इसका प्रथम अंक 8 पृष्ठों का था तथा इसके मुख पृष्ठ पर संघ संस्थापक डॉ. हेडगेवार का चित्र था। प्रथम अंक की 500 प्रतियाँ छपाई गई थीं।प्रकाशन के पहले वर्ष में ‘पाथेय’ के कुल दस अंक प्रकाशित हुए। ‘पाथेय’ नाम पहले से ही पंजीकृत होने पर पाथेय के आगे ‘कण’ लगाकर प्रार्थना-पत्र आर.एन.आई. को प्रेषित किया गया। अक्तूबर 1987 में आर.एन.आई. से ‘पाथेय कण’ नाम स्वीकृत हुआ। ...

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